घोषवाक्य

उठो. जागो. परिवर्तन लाओ.

यह घोषवाक्य स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध उद्धरण से प्रेरित है - "उठो, जागो और यह घोषवाक्य स्वामी विवेकानंद के प्रसिद्ध उद्धरण से प्रेरित है - "उठो, जागो और लक्ष्य की प्राप्ति होने तक रुकना नहीं" यह घोषवाक्य पार्टी के मुख्य दृष्टिकोण को व्यक्त करने का इरादा है. जब हम कहते हैं कि 'उठो', इसका अर्थ है कि सच्चाई जानिए और आगे बढ़ें। बेहतर भविष्य के लिए 'जागृति' की प्रतिक्रिया अपेक्षित है और 'परिवर्तन' अंतिम लक्ष्य है.

अब तक देश ने कई दलों और नेताओं के नेतृत्व में कई सरकारों का अनुभव किया है. हमने यह भी देखा है कि देश और उसके लोगों को दाँव पर लगाकर राजनीतिक दल या नेतागण धनसंपन्न हुए है. चुनावी वादें पूरी तरह से सिर्फ़ वोटों को जीतने के लिए किए गए थे तथा चुनाव और राजनीति एक गंदे व्यवसाय में परिवर्तित होकर रह गई बिना किसी राष्ट्रसम्मान और विकास की भावना के. यही विशिष्ट सूत्र दिन ब दिन दोहराया गया और बरसों तक लोगों के अनुभव में कोई बदलाव नहीं हुआ है. नतीजतन, भारतीय राजनीतिक वर्ग ने लोगों का विश्वास खो दिया. वृद्धिशील या धीमे गति से बदलाव अब पर्याप्त या स्वीकार्य नहीं है. हमारी इच्छा "संपूर्ण परिवर्तन" के लिए है.

'उठो. जागो. परिवर्तन लाओ.' कहते हुए हम एक न्यायसंगत, निष्पक्ष और सुसंस्कृत समाज विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो कि स्वतंत्रता, मुक्त व्यापार और सबसे बड़ा लोकतंत्र - भारत को बदलने के लिए राजनीतिक और सामाजिक सुधार को बढ़ावा देता है.