बदलाव सम्बन्धी कार्यसूची

बदलाव सम्बन्धी कार्यसूची

एक उदार और मुफ़्त बाजार की ओर बढ़ती पार्टी में लोगों के लिए निष्पक्षता और अवसर बढ़ाने की कोशिश के प्रति हम समर्पित हैं. एक बेहतर और निष्पक्ष समाज में सशक्त और आत्मविश्वास से भरपूर नागरिक बनें।

I. शासन संबंधी सुधार

1) नौकरशाही, पुलिस और न्याय संबंधी सुधार हो.

(क) कामकाज के नतीजे निकालने के लिए नागरिकों के विचारों को इसमें शामिल किया जाएगा.

(ख) बेहतर प्रशिक्षण और मेहनताने में वृद्धि का आधार व्यावहारिक हो.

(ग) कामकाज के लिए लोगों को इस तरह के प्रशिक्षण पर जोर होगा, जिससे वेतन वृद्धि और जीवन स्तर में सुधार संभव हो.

(घ) विशेषज्ञों की योग्यता का बेहतर इस्तेमाल किये जाने पर ज़ोर होगा.

(ङ) नौकरशाहों को चालीस वर्ष में अनिवार्य अवकाश दिया जाएगा, 40 वर्ष की आयु के बाद इनको अनुबंध के आधार/ राजनीतिक आधार पर नियुक्ति दी जाएगी.

(च) कुशल विचारों और इसके लिए कई प्रौद्योगिकी (सचल अदालतों, न्यायिक बीपीओ, कृत्रिम बौद्धिकता यानी आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, मार्गदर्शक सिद्धांतों के दौरान वास्तविक नुकसान और उसकी समूची भरपाई की व्यवस्था लागू करना) का इस्तेमाल होगा.

(छ) अच्छे विचारों का इस्तेमाल कर न्याय-प्रक्रिया को गति दी जाएगी.

(ज) उपलब्धियां न दिखाने वाले न्यायाधीशों को हटाकर उन्हें आजीवन सजा दी जाएगी.

(झ) 12 महीनों के भीतर बड़े मुकदमों के निपटारे के लिए कमर्शियल कोर्ट / मध्यस्थता कोर्ट से छह महीने में छोटे विवादों का निपटारे पर जोर दिया जाएगा.

2. राज्य की ओर से ‘सस्ते’ की जगह ‘गुणवत्ता’ पर जोर दिया जाएगा-

  • (क) बेहतरीन मानसिकता चाहे जितनी व्यवहार में लायी गयी हो, अगर वह घटिया है तो सभी सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के प्रयोग के होने के बावजूद उसमें चमक नहीं दिखेगी, ऐसे में चाहे कितनी भी मेहनत क्यों न कर ली जाए.
  • (ख) फिर नतीजा यह निकलेगा कि निजी उपक्रम गड़बड़ तरीकों से लाभ कमाते रहेंगे. इसलिए इसे सोच बदलने की ज़रूरत होनी चाहिए.
  • (ग) नुकसान के एवज में भरपाई, दुरुस्त करने की कोशिश आदि के उलट घटिया चीजों के खिलाफ नागरिकों के पास अधिकार होने ही चाहिए.

  • 3. कारोबार में सुधार और इसमें सहूलियत देने पर ज़ोर होना चाहिए-

    क. क्षेत्र

    कृषि : कृषि को सामान्य आर्धिक क्षेत्र जैसा स्वीकार किया जाय.

  • बिना किसी रुकावटों के व्यापार की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जाय.
  • कृषि उत्पादन के लिए खुली बाजार व्यवस्था अपनाई जाय.
  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों और अनेक बड़े उत्पादों के खुदरा क्षेत्र को प्रोत्साहन देकर कृषि उत्पादों के लिए बाजार को और फैलाया जाय.
  • निजी बाजारों का निर्माण करने, अनुबंध के आधार पर इन्हें लेने या भुगतान को बढ़ावा देने पर बल दिया जाय.
  • भूमि की हदबंदी ख़त्म करना है.
  • थोड़ी सी जाँच-पड़ताल से भूमि के इस्तेमाल में सुधार की अनुमति दी जाय.
  • जमीन के मालिकों को खनिजों का अधिकार मिले.
  • नई तकनीकों और खेती करने के तरीकों में किसानों को प्रशिक्षित करके उन्हें निजी व्यवसायों के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
  • इस तरह के व्यवसायों के चलन को देखने के लिए कम पैसे का और ग्रामीण बीमा की सुविधा के साथ नियम बनाने में मदद की जायेगी.
  • सिंचाई, भंडारण और ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं के अपशिष्ट, किसान और ई-मार्केट, ग्रामीण सड़क संपर्क सहित कृषि ढांचे में निजी उद्यम को ज्यादा शामिल करने पर ज़ोर दिया जाएगा.
  • मौलिक अधिकार में संपत्ति के मालिकाना हक को फिर से अपनाने पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा.
  • अनिवार्य भूमि अधिग्रहण को ज़रूरी उद्देश्यों तक इस तरह सीमित किया जाएगा, जिससे इस तरह के मामले में अधिग्रहीत भूमि के इस्तेमाल के साथ ही इसकी कीमत में वृद्धि को शामिल कर मुआवजा दिया जाएगा.
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    गृह, कुटीर और लघु उद्योगों वाले पारंपरिक कला और शिल्प को बढावा देने पर बल दिया जाएगा-

  • स्वयं-प्रमाणीकरण के आधार पर उद्योग लगाने पर खास ध्यान दिया जाएगा.
  • कर सम्बन्धी लेन-देन को आसान बनाया जाएगा.
  • भावी उद्यमियों को प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा.
  • उत्पादों के लिए बाजार के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा.
  • माइक्रो फाइनेंस यानी कम राशि वाली वित्तीय और बीमा की सुविधा
  •  

    पर्यटन –

  • भोजन, हस्तकला, पारंपरिक कला, इतिहास और धार्मिक पर्यटन स्थलों पर आवागमन का भरपूर प्रयोग.
  • पर्यटन क्षेत्र में लोगों को कुशल बनाकर एजेंसियों का हौंसला बढाया जाएगा, जिनमें गाइड देने और आतिथ्य- सत्कार भी शामिल होगा.
  • पर्यटन और बुनियादी ढांचे के निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा. इसमें होटल, घर, सड़क, रेल, वायु और जलमार्ग, पर्यटन संबंधी ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंसियों के साथ सम्पर्क भी शामिल होगा.
  • तटीय पर्यटन को और बढ़ावा मिलेगा. साथ ही, निजी और सार्वजनिक समुद्री, निजी नौकाओं और समुद्री विमानों का आसानी से चलन पक्का किया जाएगा.
  • नदी और ताजे जल क्षेत्रों में पर्यटन को तेज किया जाएगा. साथ ही, नदी के मुहानों को बेहतर बनाने और झीलों के निर्माण को प्रोत्साहन दिया जाएगा.
  • ऐतिहासिक स्थलों के संचालन और रखरखाव को निजी क्षेत्र को सौंपा जाएगा.
  • पर्यटन पुलिस और पर्यटन न्यायालय खोले जाएंगे.
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    बुनियादी ढांचे का विकास –

  • परिवहन, प्रदूषण नियंत्रण और मलमूत्र के प्रबंधन, भवन कानून और रीयल एस्टेट संबंधी के नियमों के विनियमन सहित शहरी बुनियादी ढांचे का नियमन किया जाएगा.
  • सरकारी-निजी भागीदारी के आधार पर निजी उद्यम द्वारा विकसित होने वाले सड़कों, पुलों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशनों, बस स्टेशनों को बढ़ावा दिया जाएगा.
  • बिजली उत्पादन, इसके प्रसार, वितरण और निजीकरण के साथ ही इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा शुरू की जाएगी.
  • दूरसंचार और व्यापक बैंड कनेक्टिविटी द्वारा उच्च गुणवत्ता के नेटवर्क लगाने को प्रोत्साहित किया जाएगा.
  • इंटरकनेक्टिंग शहरों में हाई स्पीड सड़कों और ट्रेन सेवाओं को बढ़ाने पर ज़ोर दिया जाएगा, जिससे बड़े शहरों में भीड़ कम करने में मदद मिले.
  • पानी को स्वच्छ बनाने और घर-घर भेजने सहित सभी की सेहत में सुधार के लिए बैठकें की जाएंगी.
  • मलमूत्र मिले जल को साफ करने की प्रणाली को बेहतर किया जाएगा.
  • एयरलाइंस, निजी विमान/ जेट, सड़क परिवहन, गाड़ियों सहित परिवहन सेवाओं को सामान्य इंसान लायक बनाया जाएगा.
  • शहरों में सिटी रेल/मेट्रो सेवाएं विकसित करने पर खास ज़ोर होगा.
  • आतिथ्य और मनोरंजन के लिए होटल, मनोरंजन पार्कों आदि को बढ़ावा दिया जाएगा.
  • सभी के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं को आसान बनाया जाएगा.
  • न्यायालय सम्बन्धी कक्षों में सुविधाएं बढ़ायी जाएंगी.
  • पुलिस थानों में सुधार करके इन्हें ऐसा बनाया जाएगा, जिसमें आम नागरिक यहां आसानी से जाना चाहे.
  • सार्वजनिक और निजी शैली के तहत आम स्थलों के निर्माण पर जोर दिया जाएगा.
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    समुद्र तटों और जलमार्ग को भरपूर बढ़ावा-

  • समुद्र तटीय पर्यटन को प्रोत्साहित करने के तहत इसमें आधुनिक पानी के जहाज़ों, द्वीप के आरामगाहों, समुद्र तटीय आवागमन और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए छोटे बंदरगाहों का निर्माण तेज गति किया जाएगा.
  • छोटे बंदरगाहों के निर्माण को हरी झंडी दी जाएगी, जिससे पर्यटन और पानी में होने वाले खेलों आदि गतिविधियों को तेज बढ़ावा मिलेगा.
  • छोटी नौकाओं और पानी पर सरपट भागने वाली छोटे जहाज़ों को बनाने और इनके रखरखाव की सुविधाओं आदि पर ध्यान दिया जाएगा.
  • सार्वजनिक और निजी क्षेत्र भागीदारी के आधार पर नदी जल मुहानों का विकास किया जाएगा.
  • जल परिवहन प्रणालियों का भरपूर इस्तेमाल होगा.
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    सभी का हो अपना घर-

  • अ. शहरों की झुग्गी बस्तियों के फिर से विकास पर विशेष जोर हो.
  • आ. ग्रामीण भारत में सस्ते आवास बने.
  • इ. शहरों में भीड़भाड़ को कम करने के लिए संपर्क जाल और शहरी उपनगरों में आवासीय विकास पर खास ध्यान दिया जाएगा.
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    सभी के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल-

  • क. स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक नियामक स्थापित किया जाएगा
  • ख. विशेष शैली से निजी स्वास्थ्य की देखभाल की अनुमति होगी
  • ग. पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल और आयुर्वेद के विकास को तेज किया जाएगा
  • घ. स्वच्छ हवा और पानी पर ध्यान देकर स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम करने पर जोर होगा
  • ङ. मिलावट रहित/ गुणवत्तापूर्ण अनाज उत्पादन तय करके अनाज से जुड़े कानूनों पर अमल होगा
  • च. निजी उद्यमों से अछूते क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं की सीमारेखा के लिए राज्यों को पहल करनी होगी.
  • छ. मेडिकल परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा.
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    कचरे को ठिकाने लगाने संबंधी प्रबंधन-

  • अ. कचरे के लिए एक प्रबंधन नियामक की स्थापना होगी.
  • आ. भारत के शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में ठोस कचरे के प्रबंधन का निजीकरण होगा.
  • इ. ऊर्जा और इससे जुड़ी परियोजनाओं में कूड़े के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जाएगा.
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    सभी के लिए प्रतिदिन और चौबीस घंटे बिजली और पानी की आपूर्ति-

  • क. बिजली उत्पादन और इसके वितरण के साथ ही पानी को साफ कर इसके वितरण का काम राज्य से वापस लिया जाना चाहिए.
  • ख. ऊर्जा और पानी क्षेत्रों में निजी भागीदारों के बीच प्रतियोगिता करने पर जोर होगा.
  • ग. नियमों को असरदार बनाने पर जोर होगा.
  • घ. चौबीस घंटे बेहतर बिजली और पीने लायक पानी देने पर जोर होगा.
  • निजी उपक्रमों के लिए गैरकिफायती क्षेत्रों में राज्य को निजी निवेश की मिलेगी सुविधा

  • (क) लाइसेंस और इसकी मंजूरी आसान बनायी जाएगी.

    (ख) ठेके के काम को साफ-सुथरा बनाने पर जोर दिया जाएगा. इसमें वास्तविक लागत और इसे व्यवस्थित करने के लिए इस तरह की सुरक्षा होगी, जिससे ठेके की गैरजरूरी मुक़दमेबाजी में खर्च आदि में कमी आये.

    (ग) टैक्स के ढांचे को सरल बनाकर और टैक्स के स्तरों को कम करके राजस्व उगाही में वृद्धि की जाएगी.

  • (घ) आयकर के ढेर सारे स्तरों को बढाने पर जोर दिया जाएगा, जिससे सालाना 12 लाख तक की आय को टैक्स फ्री बनाया जा सके.
  • (ङ) टैक्स चोरों को जेल भेजा जाए, लेकिन ऐसा तभी हो जब न्यायालय इसके बडे चोरों को पकड़ पाये. सार्वजनिक निविदा- सार्वजनिक निविदाओं के वितरण का तरीका ऐसा हो, जिसमें वर्तमान कम से कम कीमत पर ज्यादा से ज्यादा गुणवत्ता की ओर बढ़ा जा सके.
  • (च) तय कम से कम लागत मूल्य के साथ 8 प्रतिशत मार्जिन से नीचे कोई नीलामी स्वीकार न की जाए.
  • (छ) सहायक निविदाओं का पालन करने के लिए बोलियों के मूल्यांकन के लिए पब्लिक टेंडर कॉन्ट्रैक्ट.

  • 4. किसी के पक्ष में जाने के बाद पब्लिक टेंडर पर फिर से कोई बातचीत नहीं होगी.

  • अ. ई-शासन और पारदर्शिता- सभी प्रशासनिक और न्यायिक फैसले के साथ ही इसके पीछे के कारण बताये जाएंगे.
  • आ. तर्कों के साथ सभी सरकारी फैसले सभी सरकारी वेबसाइट पर डाले जाएंगे, राष्ट्रीय सुरक्षा जैसी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सूचनाओं को यहां छोड़ दिया जाएगा.
  • इ. सूचना के अधिकार के अंतर्गत प्रश्नों को सामने रखकर देखा जाएगा.
  • ई. सभी नागरिकों के साथ सरकार और अदालत के संपर्क से दिए गए आदेशों को वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाएगा.

  • पर्यावरण और वनीकरण संबंधी सुरक्षा होगी

  • क. नदियों और अन्य जल क्षेत्रों का पुनरुद्धार होगा
  • ख. बड़े पैमाने पर वनीकरण अभियान चलाया जाएगा
  • ग. प्रदूषण नियन्त्रण संबंधी कड़े कदम लागू किये जाएंगे
  • घ. बारिश के जल को इकठ्ठा करने और जमीन के भीतर के पानी के स्तर को ऊपर लाने पर ज़ोर दिया जाएगा.

  • व्यावसायिक और कुशलता आधारित शिक्षा में सुधार (रोज़गार से जुड़ी योग्यता में सुधार के साथ) कुशलता बढ़ाकर शिक्षा को बेहतर बनाने पर जोर होगा.

  • अ. व्यावहारिक दृष्टिकोण वाली शिक्षा पर जोर.
  • आ. निजी स्कूलों, कॉलेजों और संस्थानों में लाभ से जुड़ी सोच की अनुमति होगी.
  • इ. सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर आधारित ऐसे स्कूल खोलने पर काम होगा, जहां समाज के आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के छात्रों के लिए 50 प्रतिशत सीटें सुरक्षित होंगी.
  • ई. सरकारी स्कूल में सस्ती शिक्षा उपलब्ध होगी और इन्हें सीएआर से अनुदान और राज्य बजट से भी अनुदान मिलेगा.
  • उ. शिक्षा के बुनियादी ढांचे और शिक्षा की गुणवत्ता पर जोर देने के लिए नियमावली बनेगी.
  • ऊ. उच्च गुणवत्तापूर्ण नौकरी लायक लोग बनाने पर ज़ोर दिया जाएगा.
  • ओ. राज्य शिक्षा में निवेश उन क्षेत्रों तक सीमित होगा जो निजी उपक्रमों के लायक न हों.

  • अदालतें उन जनहित याचिकाओं- पीआईएल से दूर रहें, जहां वैकल्पिक जनहित न्यायाधिकरण या छोटी अदालतें स्थापित होनी हों.

  • अदालतों का ज़ोर विवाद और ऐसे हालातों में तेजी से न्याय सुलभ करने पर होना चाहिए.
  • अदालतें खुद को कानून की व्याख्या तक सीमित रखें और उन्हें कानून बनने की पात्रता की व्याख्या से दूर रहना चाहिए.
  • सभी विधेयक चुने जन प्रतिनिधियों के अधिकार क्षेत्र में लाते हैं या लाये गये विधेयक प्रशासनिक कार्यालयों के दायरे में आते हैं.
  • शासन की असफलताओं में न्यायिक समीक्षा संबंधी उसके फैसलों से निपटने के लिए एक विशेष न्यायाधिकरण या छोटी अदालत बनाई जा सकती है (पीआईएल न्यायाधिकरण के फैसलों की सत्यता या उनके औचित्य को जांचने के दायरे की सीमा के अंतर्गत).

  • टैक्स चुकाने संबंधी व्यवस्था में सुधार और कालेधन के खत्म करने पर ज़ोर हो, जिससे करों के निचले स्तर की मूल व्यवस्था को अपनाकर टैक्स संबंधी पालन को आसान बनाया जा सके.

  • इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन का तरीका बनाकर नकदी की जगह इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन को प्राथमिकता देना जरूरी है.
  • कालेधन/बेनामी संपत्ति के विरुद्ध कड़ाई से कानून का पालन हो.
  • आधार प्रणाली का इस्तेमाल करने के साथ निजी जानकारी संबंधी के लिए कानूनी तरीका अपनाया जाय.
  • बुनियादी अधिकार के अंतर्गत इस्तेमाल हो रही ज़मीन और इसके विकास को लेकर इसकी कीमत के आधार पर ज़मीन के अधिग्रहण और मुआवजा के आधार पर ज़मीन प्राप्त करके संपत्ति के अधिकार की बहाली पर जोर दिया जाए.


    सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनियों का हो निजीकरण

  • (क) राज्य को चाहिए कि वह नागरिकों के लिए एक बेहतर उपक्रम का माहौल बनाकर शासन चलाए.
  • (ख) सामाजिक न्याय में योगदान करने के लिए नागरिकों को प्रोत्साहित किया जाए, सक्षम समाज का निर्माण हो और गरीबी को खत्म करने जैसे मुद्दे को इनमें शामिल किया जाए.
  • (ग) स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा क्षेत्र में निवेश के दौरान निजीकरण से मिले राजस्व का इस्तेमाल हो.

  • बौद्धिक सम्पदा : तीन वर्षों तक के पेटेंट अधिकारों की सुरक्षा सीमा होनी चाहिए.

  • किसी आविष्कार/ बौद्धिक सम्पदा से जुडे लाभ को तीन साल से ज्यादा होने पर रोक देना चाहिए.
  • कॉपीराइट सुरक्षा की अवधि सीमा छह महीने की होनी चाहिए.
  • कॉपीराइट सुरक्षा को निरंतर वैज्ञानिक उन्नयन की ज़रूरत देखते हुए बढ़ाया भी जाएगा.
  • इससे सामान्य लोगों की पहुंच में दवाएं कम कीमत पर रखना, जीवनरक्षक औषधि, मेडिकल उपकरण आदि बनाने में आसानी होगी.
  • मनोरंजन सस्ता और सर्वसुलभ होगा.
  • एक ज़रूरी ट्रेडमार्क संरक्षण कानून अवश्य पारित किया जाना चाहिए.

  • राजनीतिक सुधार

    1. उच्च पदों पर बैठे लोगों, विशेष रूप से नेताओं का सम्मान होना अच्छी बात है लेकिन पैसे से जुड़े भ्रष्टाचार तक ही इनका मामला सीमित नहीं है. हमें तो सभी तरह के अनुचित कार्यों को रोकना है.

    2. पार्टी के सभी सदस्यों को आय के वैकल्पिक स्रोत होने के बावजूद, जब तक कि कानून द्वारा अंकुश न लग जाए - यह राजनीतिक कामकाज से गुजारा करने का जरिया बना रहता है.

    3. कभी-कभी आन्तरिक या अन्य चुनाव होते रहने से नेतृत्व ज़मीनी स्तर पर अधिकार-संपन्न बना रहता है और विभिन्न स्तरों पर पार्टी आर्थिक रूप से मजबूत बनी रहती है.

    4. चुनावों में मिलने वाले रूपए-पैसे की पारदर्शिता, जब-जब कोष में वृद्धि की खबरें आतीं और वे प्रकाशित होती हैं, 5000 रुपये से ज्यादा का योगदान हो, तो उसे नक़द ही लिया जाएगा और इसकी ऑनलाइन जानकारी से सबको पता रहेगा.

    5. पार्टी में गंभीर अपराध में लिप्त लोगों के प्रवेश की मनाही है.

    6. पार्टी में किसी तरह के वंशवाद के लिए कतई जगह नहीं है. पार्टी के वर्तमान सदस्यों के ज़बरदस्त प्रभाव वाले क्षेत्रों के बाहर नये आये लोगों को कार्य कर सकते हैं.

    7. मतदाता को पार्टी के भीतर जाति, धर्म या समुदाय के रूप में देखने की मनाही है. यहां तक कि राजनीतिक प्रभाव जमाने के लिए ऐसी बातचीत या निर्णय लेने से भी दूर रहना होगा.

    8. शासन को असरदार बनाने और रचनात्मक विपक्ष के लिए नेतृत्व और कार्यकर्ताओं को समय-समय पर प्रशिक्षित कर उनकी कुशलता निखारी जा सकती है.


    सामाजिक सुधार

    गुणों को प्राथमिकता देकर आरक्षण की जगह सकारात्मक कामकाज को बढ़ावा देने पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा.

  • आरक्षण सकारात्मक पहल की एक शक्ल है. इसलिए सकारात्मक कार्य का उद्देश्य समाज के वंचित वर्ग को राज्य का समर्थन मुहैया कराना है. < /li>
  • 3. भारतीय राज्य ने तय किया है कि वंचित वर्ग को कथित ऐतिहासिक-सामाजिक कई अन्याय से जोड़ने की ज़रूरत है, जो लम्बे समय से जाति आधारित असमानता पर टिका हुआ है. यह असावधानी से निकला असर है, जिससे समाज में भेदभाव कायम है, जबकि इसका लक्ष्य इसके विपरीत दिशा में मौजूद है.
  • आरक्षण का योग्यता पर विपरीत असर पड़ता है. इससे जनसंख्या के बेहद छोटे हिस्से को ही लाभ मिल पाया है. इसके अलावा, इस समय आरक्षण का लाभ कुछ ऐसे परिवारों को ही मिलता दिखता है जो पहले से आरक्षण की मलाई खाकर लाभ उठते रहे हैं. इसलिए आरक्षण के इस तंत्र से सीमित लोगों को फायदा मिल पाया है.
  • सकारात्मक कार्य के जरिए राज्य से समर्थन मिलने से इसके लाभ उन लोगों तक ही सीमित नहीं रहने चाहिए, जिनके पूर्वज अन्यायों की मार सहते आये हैं (अगर अन्याय अपने अन्य शक्लों में प्रासंगिक नहीं है) तो आज के समाज के सभी वंचित नागरिकों को आरक्षण मिलना चाहिए.

  • प्रस्तावित विकल्प

  • योग्यता न हो, तो विपरीत असर होता है. इससे जाति के असर बने रहते हैं, इसलिए आरक्षण को पूरी तरह खत्म किया जाना चाहिए.
  • आर्थिक समर्थन देकर कॉर्पोरेट की सामाजिक जिम्मेदारी को नये मुकाम की ओर ले जाने की कोशिशों और शिक्षा में सब्सिडी देने और व्यापार के लिए पैसे आदि मुहैया कराकर इसके फ़ायदा उठाने वालों की संख्या बढ़ाई जा सकती है.
  • चूंकि अंग्रेज़ी विश्वभर में व्यापार करने की सरल भाषा है, इसलिए इसी की शिक्षा देना आज समय की मांग है.
  • इसके अलावा, जाति/वर्ग पर चोट करके, राज्य की ओर से अंतर्जाति, अंतर्समुदाय और अंतर्धार्मिक विवाहों में चलन बनाए रखने के लिए पैसे देना होगा.

  • 6. आत्मरक्षा के अधिकार को बढ़ावा देने के लिए खुली बंदूक लाइसेंस की मिले अनुमति

  • क. प्रत्येक नागरिक को अपनी सुरक्षा का बुनियादी अधिकार है.
  • ख. अपनी सुरक्षा के लिए किसी को स्वयं हथियार लेकर चलने का अधिकार इस आधार पर होना चाहिए कि राज्य के सुरक्षा बल/पुलिस नागरिकों की पक्की सुरक्षा करे.
  • ग. जहां राज्य के सुरक्षा बल/पुलिस सुरक्षा नहीं कर पा रही हो, वहां नागरिकों को हथियार रखने का अधिकार होना चाहिए.
  • घ. ये अधिकार सिर्फ तभी तक हों. जब एक अपराधी हमेशा गैरक़ानूनी तौर पर हथियार लेकर घूम रहा हो और सामान्य नागरिक अपराधियों के आगे लाचार महसूस करने लग जायं.
  • ङ. हथियारों का इस्तेमाल या इन्हें लेकर चलने से आपराधिक कानून के किसी प्रावधान का कोई उल्लंघन नहीं होता. इसलिए किसी को आत्मरक्षा का अधिकार आपराधिक कानून के तहत सीमित किया जाना समय की मांग है.
  • च. जिनकी आपराधिक पृष्ठभूमि रही हो, वे हथियारों को लेकर चलने का अधिकार नहीं रखने चाहिएं.
  • छ. हथियार लेकर चलना समाज में ज्यादा भरोसा पैदा करता है.
  • ज. हथियारों के साथ चलना एक सोच दर्शाता है.

  • 7. वेश्यावृत्ति की क़ानूनी अनुमति हो, इसे अपराध न माना जाए

  • (क) भारतीय माहौल में महिलाओं का लैंगिक शोषण का मुख्य कारण पुरुषों की हताशा मानी जाती है.
  • (ख) इस हताशा को कम करने के लिए कमर्शियल आधार पर लैंगिक रिश्ते की जरूरतें उपलब्ध हैं. ऐसा होने पर महिलाओं का शोषण कम होगा.
  • (ग) महिलाओं/पुरुषों के शारीरिक रिश्ते के मामले में उनके बलपूर्वक शोषण के खिलाफ कानून का सख्ती से अमल हो.
  • (घ) दूसरे पेशेवर लोगों की तरह, आम लोगों को साफ, सुरक्षित और स्वेच्छा से अपने अधिकारों की रक्षा करनी होगी.

  • 8. समलैंगिक यौन संबंध, व्यभिचार और दो-विवाह प्रथा को दोषमुक्त करने पर जोर हो

  • (क) भारतीय परंपरा और संस्कृति में समलैंगिक यौन संबंध, व्यभिचार और दो विवाह प्रथा को आपराधिक विचार कभी नहीं माना गया है. समलैंगिकता भारत में बाहर से लायी गयी है. यह पुरातनपंथी सोच पर आधारित भी है.
  • (ख) इनमें से किसी को भी अपराध नहीं माना जाना चाहिए और इसके आधार पर इसमें कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए. इनमें सिर्फ तलाक़ शामिल हो सकता है.

  • 9. पुरुषों और महिलाओं के लिए एकसमान नागरिक संहिता को लागू किया जाय.

  • सभी नागरिकों को समस्त कानूनों के आईने में लिंग, जाति, धार्मिक समुदाय के व्यवहार से ऊपर उठकर एकसमान माना जाएगा.
  • अलग निजी कानून के निर्माण संबंधी विचार ऐतिहासिक हैं, क्योंकि बीत चुका समय आधुनिक विश्व का अतीत है, जो समानता पर आधारित विचारों पर टिका है.

  • 10. सैन्य बल और पुलिस में 30 प्रतिशत महिलाएं हों

  • हथियार लेकर चलने के अधिकार के तहत हथियारबंद बलों/पुलिसकर्मी महिलाएं शामिल हों, इससे हथियार लेकर चलने महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा और लिंग के आधार पर सच्ची समानता लाने में यह कोशिश ‘मील का पत्थर’ साबित होगा.
  • कोई कारण नहीं है कि हथियार लेकर चलने वाली महिलाएं किसी भी तरह से पुरुषों से कम नहीं हैं. वे देश की रक्षा करने में कम नहीं हैं. साथ ही कानून का शासन कायम करने में महिलाओं का कोई सानी नहीं है.
  • 11. भारतीय परम्परा और संस्कृति की रचनात्मकता में फिर से जान फूंक कर इसे मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा.
  • 12. दूसरों की संवेदनाओं की परवाह न करते हुए कानून द्वारा सीमित पीने, खाने, कपड़े पहनने, जीने और स्वयं के विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता की सुरक्षा करना.

  • 4. बुनियादी ढांचे में सुधार (इनमें संवैधानिक संशोधनों की ज़रूरत है)


    1. प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा मुख्यमंत्री/ राज्यपाल की नियुक्ति

    1. Directly elected prime minister/president (same for chief minister/governor)

  • क. यहां सिद्धांत है कि राज्य का मुख्य कार्यकारी सीधे नागरिकों के प्रति जिम्मेदार होता है. (यानी वह सांसदों, विधायकों या उनकी पार्टी के दूसरे नेताओं के लिए नहीं)
  • ख. मुख्य कार्यकारी कार्यकारी निर्णय लेने में, सांसद/ राज्य विधायकों या पार्टी प्रमुखों के हितों में संतुलन बिठाए बिना फैसले ले सकता है.
  • ग. किसी भी पद/विभाग पर रहते हुए उनकी सुरक्षा को लेकर फैसला नहीं लेगा.
  • घ. विधायिका संबंधी फैसले लेने में संसद या राज्य विधानसभाओं की अनदेखी नहीं होगी.

  • 2. वर्तमान चुनाव मानकों के आधारित, समानुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर लोकसभा और विधानसभाओं की 50 प्रतिशत सीटें होनी चाहिए.

  • इससे मौजूदा प्रणाली में सुधार होगा यानी लोकसभा और विधानसभाओं के लिए फिर से चुनाव कराने ज़रूरी होंगे.
  • बड़े मत प्रतिशत (पांच प्रतिशत से ज्यादा) के साथ हर पार्टी लोकसभा और विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व का दम रखती है.
  • निर्दलीय भी मौजूदा चुनाव प्रणाली के ज़रिये चुने जाने की पात्रता रखने लगेंगे.

  • 3. छोटे राज्य

  • शासन का संचालन आसान बनाने के लिए राज्यों को छोटी-छोटी इकाइयों में बांटा जाना चाहिए.
  • भौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टि से राज्यों का विखंडन सही होगा.

  • 4. संघीय संरचना

  • क. संविधान की पहली सूची में रक्षा, विदेश मामले, न्यायपालिका, मौद्रिक, संघीय अपराधों, केन्द्रीय कर आदि पर नियंत्रण केंद्र सरकार का अवश्य होना चाहिए.
  • ख. राज्यों का अन्य प्रशासनिक मामलों पर नियन्त्रण हो सकता है. इसमें केंद्र का दखल नहीं रहेगा. राज्य पुलिस और राज्य के करों आदि पर सीधे राज्य का नियंत्रण होना चाहिए. (संविधान में दर्ज दूसरी सूची के अनुसार)
  • ग. राज्यों के लिए अनुच्छेद-370/विशेष स्तर को समाप्त किया जाना चाहिए.
  • घ. नागरिकों को घूमने, व्यवसाय करने, ज़मीन खरीदने और आवास सम्बन्धी अधिकार राज्य का होना चाहिए.
  • ङ. कोई भी राज्य अपने यहां और अन्य राज्य के निवासियों के साथ भेदभाव नहीं कर सकता.

  • 5. स्थानीय प्रशासन

  • संविधान में शामिल नई सूची-चार के अनुसार स्थानीय प्रशासन में केंद्र या राज्यों का कोई दखल नहीं होगा.
  • स्थानीय प्रशासन के पास पुलिस और प्रशासन का अधिकार होगा.
  • स्थानीय स्तर पर राजस्व वसूली का अधिकार होगा.

  • 6. संवैधानिक समीक्षा

  • अ. मौजूदा संविधान विदेशी शासकों द्वारा भारत सरकार अधिनियम, 1935 पर व्यापक रूप से आधारित है.
  • आ. मौजूदा संविधान में अधिकांश प्रावधानों में स्वतंत्रता के कई विचार, नागरिक की प्राथमिकताएं, नागरिकों की सेवा सम्बन्धी राज्यों की भूमिका, संघवाद, तेज़ न्याय प्रक्रियाएं, कानून में भविष्य की घटनाओं को लेकर दृष्टि (यह शासन प्रणाली के सामान्य कानून से दूर होते जाने) आदि.
  • इ. एक अपीलीय उच्चतम न्यायालय और एक अन्य संवैधानिक उच्चतम न्यायालय का श्रीगणेश होगा.