लिबरल पार्टी ऑफ़ इंडिया का संविधान

लिबरल पार्टी ऑफ़ इंडिया का संविधान

प्रस्तावना

विदेशियों के शासन से स्वतन्त्रता का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्तिगत स्तर पर हम सच्चे अर्थों में सबल हो गए हैं. इसलिए अनिवार्य है कि हम भारतीय एकजुट हों और व्यक्तिगत स्तर पर लोगों को सच्ची स्वतंत्रता का अनुभव हो.

राष्ट्रीय क्षमताओं के दोहन और उसे मूल्यवान बनने की जरूरत है. साथ ही, इसे राज्य की अक्षमताओं से मुक्त करने की भी जरूरत है. राज्य के कार्य और निर्णय प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की आवश्यकता है. न्यायिक प्रक्रिया को अपेक्षाकृत ज्यादा गतिशील और उम्मीद के मुताबिक बनाने की जरूरत है. राज्य का ध्यान शासन चलाने, कामकाज को बेहतर बनाने और जनता को इनसे दूर रखने पर होना चाहिए. इसके लिए जनता के हाथों में व्यापारिक उपक्रम का मालिकाना हक़ सौपने की जरूरत है.

आर्थिक सम्पन्नता लाने के लिए मुक्त बाज़ार व्यवस्था को तेज़ करना समय की मांग है. साथ ही निष्पक्षता और समान अवसर मनुष्य की समस्त क्षमताओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिये सर्वोपरि है. सामाजिक न्याय प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य भी है.

व्यक्तिगत स्तर पर स्वतंत्रता के अधिकार का विस्तार करने और विचारों की भिन्नता की रक्षा करने की ज़रूरत है. साथ ही, ऐसे विचारों की भी रक्षा ज़रूरी है जहाँ असहमति है. इसी तरह ‘लाभ’ शब्द को व्यापक वैधानिकता देने और स्वीकार करने की भी ज़रूरत है. हालांकि कारोबार में लाभ और एकाधिकार पर अंकुश रखने की आवश्यकता है.

व्यक्तिगत स्वतंत्रता में विशेष रूप से शामिल बिंदु हैं :

(क) समाज में व्यापक न्याय और निष्पक्षता लाने, समान अवसर का निर्माण करने और प्रत्येक नागरिक को बुनियादी ज़रूरतों जैसे- रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधा सुलभ कराने; और

(ख) संविधान के दायरे में स्वीकृत प्रत्येक व्यक्ति विचार, शब्द और कर्म की अधिकतम स्वतंत्रता सुनिश्चित करना शामिल है.

इसी दृष्टिकोण के साथ कि हम समान विचारों वाले भारतीय नागरिकों ने एकजुट होकर एक अक्षुण्ण नये उदारवादी आन्दोलन को उभारने का संकल्प उठाया है, जो लिबरल पार्टी ऑफ़ इंडिया के रूप में सामने है.

अनुच्छेद-1- नाम

पार्टी का नाम ‘लिबरल पार्टी ऑफ़ इंडिया’ होगा (अब आगे इसका ज़िक्र “LPI” या “पार्टी” के रूप में होगा).

अनुच्छेद-2- पार्टी के उद्देश्य

पार्टी के लक्ष्य और उद्देश्य निम्नलिखित हैं :

1. भारत में शासन की शैली के अनुसार बुनियादी बदलाव लाने, उसकी न्यायिक, नौकरशाही और पुलिस प्रणालियों को अनुकूल बनाने, व्यापार का चलन और नागरिकों के अधिकार व्यावहारिक किये जाएंगे. पर्यावरण की रक्षा सुनिश्चित होगी और समाज में पारदर्शिता लाई जाएगी.

2. ऐसी नयी राजनीतिक संस्कृति की स्थापना होगी, जहाँ नागरिक और व्यक्तिगत अधिकारों को केंद्र में जगह मिलेगी.

3. स्वतंत्रता, न्याय, निष्पक्षता, व्यक्तिगत ख़ुशी, नागरिकों के सशक्तिकरण, कानून का शासन और आत्म-परिष्कार से भरी-पूरी संस्थानिक शैली अपनायी जाएगी.

4. राजनीति, प्रशासन और शासन, नौकरशाही, पुलिस और न्यायालय को समान रूप से उभारने, अर्थव्यवस्था को विकसित करने और हमारे पर्यावरण की सुरक्षा करने, साथ ही भारतीय परंपरा और संस्कृति को सहेजने पर जोर होगा.

5. सच्चे अर्थों में गुणवत्ता के निर्माण और गुणों को उभारने पर जोर, सभी को उनकी क्षमताओं के अनुसार समान अवसर प्रदान करते हुए सच्चे अर्थों में सामाजिक न्याय प्रदान किया जायेगा.

6. प्रत्येक व्यक्ति चाहे वह युवा हो या वृद्ध, पुरुष, महिला हो या कोई और, पर्याप्त ज्ञान हासिल करे और कुशल बने, जिससे वह अपनी खुशियों में सुधार कर उत्पादक हिस्सेदार बन पाए, धन कमाये, पर्यावरण का बेहतर सृजन करे, परंपरागत मानवीय और स्वास्थ्य तंत्र बहाल करे. साथ ही निरंतर आर्थिक और मानव विकास को बढ़ावा दे.

7. नागरिक केन्द्रित समस्याओं जैसा भाग-1 में विशेष रूप से व्यक्त मुख्य सिद्धांतों पर शासन से जवाब प्राप्त कर उस पर ज़ोर दिया जाएगा.

अनुच्छेद-3 पार्टी की सदस्यता

1. किसी को पार्टी सदस्यता के लिए (1) एक आवेदन पत्र और (2) समय-समय पर पार्टी घोषणा के अनुरूप अलग से आवेदन पत्र और (3) अनुच्छेद-3(7) के अंतर्गत निम्नलिखित भुगतान के रूप में वापस न होने वाली सदस्यता शुल्क देना होगा.

2. सदस्यता के लिए प्रत्येक आवेदन पत्र पर संबंधित अध्यक्ष द्वारा विचार किया जाएगा. (अनुच्छेद-12 के अंतर्गत परिभाषित), जो अनुमोदित या उसे नामंजूर कर सकते हैं, संबंधित अध्यक्ष द्वारा किसी भी व्यक्ति की सदस्यता आवेदन में उनका नाम पार्टी के डेटाबेस में पंजीकृत होगा और तभी वह पार्टी का सदस्य होगा.

3. अनुच्छेद -3 के निम्नलिखित के अंतर्गत पार्टी की सदस्यता इस प्रकार वर्गीकृत है :

(क) सामान्य सदस्य- प्रत्येक व्यक्ति की सदस्यता 5 वर्ष की अवधि की होगी. इसके बाद नवीकरण के लिए भुगतान करने पर अगली अवधि के लिए वह नए सिरे से सदस्य हो जायेगा. एक सामान्य सदस्य को अपने मत पार्टी के आन्तरिक मामलों में रखने का अधिकार होगा और वह किसी भी चुनाव में पार्टी टिकट के साथ मैदान में आएगा, लेकिन वह पार्टी कार्यालय में किसी पद का आन्तरिक चुनाव नहीं लड़ सकेगा.
(ख) सक्रिय सदस्य(ता)- प्रत्येक वह व्यक्ति जो वित्तीय योगदान करेगा, पार्टी का सक्रिय सदस्य बन जाएगा. सामान्य सदस्य उपलब्ध अपने अधिकारों के अतिरिक्त सिर्फ सक्रिय सदस्य पार्टी के आन्तरिक चुनाव/पद के लिए खड़े होने का अधिकार रखेगा. प्रत्येक सक्रिय सदस्य को पार्टी की नियमित गतिविधियों में हिस्सा लेना होगा और सामान्य सदस्य के रूप में जरूरी होने पर उसे फिर से सदस्यता लेनी होगी. ऐसा न कर पाने की स्थिति में उसकी सक्रिय सदस्यता संबंधित कार्यकारी समिति रद्द कर सकती है. इसके बाद वह सामान्य सदस्य ही रह जाएगा.

4. राष्ट्रीय परिषद् द्वारा पारित प्रस्ताव से पार्टी को अनुच्छेद-3 में संशोधन की शक्तियां मिलेंगी और वह दूसरी श्रेणियों का सृजन या मौजूदा श्रेणियों में सुधार कर सकेगा.

5. भारत के किसी भी नागरिक के लिए पार्टी की सदस्यता खुली है. इसमें वे समुद्रपारीय भारतीय नागरिक भी शामिल हो सकते हैं जो 18 साल के हैं और जिन्होंने पार्टी संविधान के पालन की लिखित सहमति व्यक्त की है. इसके खंड-1 में उल्लिखित मुख्य सिद्धांतों में हैं, कि ऐसे नागरिक-

6. अ. भारतीय निर्वाचन आयोग में किसी भी अन्य मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के सदस्य नहीं हैं;

7. ब. किसी ऐसे संगठन के सदस्य नहीं हैं जिनके विचारों, नीतियों या कार्यों में पार्टी के उद्देश्यों के साथ टकराव नहीं हैं और/ या

8. स. न्यायालय द्वारा ऐसे किसी अपराध में लिप्त नहीं है जिनमें छह महीने के कारावास का प्रावधान हो. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लिखित रूप में कारणों को रिकॉर्ड करा सकते हैं. इसमें किसी व्यक्ति की योग्यता अनुकूल नहीं पायी गयी.

6. 9. सदस्यता स्थान-

10. (क) किसी भी व्यक्ति के सामान्य आवास या उसके कारोबार के (पते) का उल्लेख करते हुए उसे सदस्य बनाया जा सकता है और उसकी सदस्यता को ऐसे ही पते पर पंजीकृत होना होगा, लेकिन एक समय में एक से ज्यादा पते के आधार पर सदस्यता नहीं दी जाएगी.

11. (ख) यदि कोई सदस्य अपना पता बदलना चाहता है, तो उसे राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा इस कार्य के लिए अधिकृत पार्टी पदाधिकारी को ऐसे बदलाव की लिखित जानकारी देनी होगी. यह पदाधिकारी बदलाव को रिकॉर्ड में रखने का कार्य देखने के लिए नियुक्त है. वह पार्टी के डेटाबेस में पता बदल देगा. इसके बाद पार्टी के केन्द्रीय डेटाबेस में बदला पता अंकित हो जायेगा.

12. सदस्यता स्थान- (अ). कोई भी व्यक्ति सामान्य पते या व्यापार के स्थान के पते के आधार पर सदस्य बन सकता है. इस तरह उनकी सदस्यता ऐसे पते के उल्लेख के आधार पर पंजीकृत हो जाएगी, कोई सदस्य एक से अधिक पते के आधार पर पंजीकृत नहीं होगा.

13. (ब) यदि कोई सदस्य पता बदलना चाहता है, तो ऐसे सदस्य को राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा अधिकृत पार्टी पदाधिकारी को ऐसी लिखित सूचना देनी होगी.

14. किसी की भी सदस्यता के एवज में सदस्यता शुल्क का भुगतान करना होगा, सदस्यता के नवीनीकरण के समय रुपये 10/- के भुगतान या समय-समय पर राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा.

8. कैसे होगी सदस्यता समाप्ति

कोई भी सदस्य निम्नलिखित स्थिति में सदस्य नहीं रह जायेगा;

अ. मृत्यु, त्यागपत्र या झूठी घोषणा द्वारा सदस्यता हासिल किया हो;

आ. समय-समय पर राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार इस संविधान में व्यक्त निष्कासन या हटाने सम्बन्धी परिस्थिति (प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुपालन के अंतर्गत)

16. (इ) यदि वह सदस्य है या किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी में शामिल होता है; या

17. न्यायालय द्वारा किसी ऐसे अपराध में दोषी करार दिया गया हो, जिसमें 6 महीने की क़ैद की सज़ा का प्रावधान हो, तो राष्ट्रीय अध्यक्ष ऐसे व्यक्ति की सदस्यता को खत्म करने के खिलाफ लिखित में कारणों को रिकॉर्ड कर सकते हैं. सदस्यता सम्बन्धी किसी भी निरोध या निलंबन को पार्टी की वेबसाइट पर डाला जाएगा. ऐसी सम्यक सूचना सभी सदस्यों और दूसरे संबंधित सदस्यों के लिए होगी.

9. सदस्यता का निलंबन

अनुच्छेद- 3 (8) (बी) या (डी) के अंतर्गत किसी भी पहल से पहले, किसी इकाई के अध्यक्ष के अधीन जहां का संबंधित सदस्य का अपना पता दर्ज है, अंतिम निर्णय होने तक ऐसे सदस्य की सदस्यता निलंबित रह सकती है.

10. सदस्यता संबंधी डेटाबेस

पार्टी अपने सदस्यों का ऐसा केंद्रीय डेटाबेस कायम करेगी, जहां सामान्य सदस्य और सक्रिय सदस्य को अलग-अलग रखा जाएगा.

इस केन्द्रीय डेटाबेस में सदस्यों के पते और दूसरे ज़रूरी विवरण होंगे और इन्हें मासिक रूप से राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा नवीनीकृत किया जाएगा. इसी में इस संविधान के अनुसार सदस्यों की स्थिति, पता, नए सदस्यों के पंजीकरण, सदस्यों की रोक या निलंबन आदि की ताज़ा जानकारी मिलेगी और पार्टी के किसी आन्तरिक व्यवस्था से किसी भी हलचल का व्योरा होगा.

अनुच्छेद-3 और अनुच्छेद-4 के उद्धेश्यों के लिए संबंधित अध्यक्ष और संबंधित कार्यकारी समिति अनुच्छेद-13 (8) में स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सक्रिय रहेगी.

अनुच्छेद 4-संगठनात्मक ढांचा

पार्टी की नीचे दी गयी इकाइयों में निम्नलिखित बहुस्तरीय संगठनात्मक ढांचा होगा :

(क) प्राथमिक इकाई- चुनाव में मतदान केंद्र स्तर पर.

(ख) स्थानीय निकाय इकाई- एक स्थानीय निकाय इकाई, अर्थात् ग्राम पंचायत, नगर वार्ड, नगर निगम डिवीज़न या ऐसे दूसरे स्तर पर, जैसा राष्ट्रीय कार्यकारी समिति समय-समय पर व्यवस्थित करे.

(ग) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र स्तर की इकाई- राज्य विधानसभा क्षेत्र स्तर पर.

(घ) संसदीय निर्वाचन क्षेत्र इकाई- संसदीय निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर.

(ङ) राज्य इकाई- राष्ट्रीय कार्यकारी समिति राज्य में भौगोलिक आधार पर किसी भी इकाई को एक से ज्यादा संख्या में विभाजित कर सकती है. इस स्थिति में प्रत्येक विभाजित इकाई एक अलग राज्य इकाई होगी.

(च) राष्ट्रीय इकाई- राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करेगी.

(छ) अन्य इकाई- राष्ट्रीय कार्यकारी समिति समय-समय पर दूसरी कई इकाई का गठन कर सकती है. इनमें पेशेवर, महिलाएं, युवा, छात्र, अध्यापक, किसान, औद्योगिक श्रमिक और दूसरी कई श्रेणी होंगी. जो ऐसे अन्य उचित स्तरों या इकाईयों के हिस्सा होंगी. जिनमें उपयुक्त लोगों को रखा जाएगा.

एक बार गठित हो जाने के बाद ज़रूरी न्यायिक क्षेत्राधिकार के अधीन भारतीय निर्वाचन आयोग या अन्य सरकारी निकाय की ओर से किसी पुनर्गठन/परिसीमन की स्थिति में पार्टी की कोई भी इकाई तब तक कायम रहेगी, जब तक राष्ट्रीय कार्यकारी समिति उसे भंग नहीं कर देती. मौजूदा पार्टी इकाई, अन्य प्रावधानों के बावजूद भंग हो जायगी. तब पुनर्संरचना/परिसीमन के छह महीने के भीतर ताज़े आन्तरिक चुनाव कराये जाएंगे.

उपर्युक्त प्रत्येक पार्टी इकाई की स्थापना और कार्य निम्नलिखित अनुच्छेद-4(3), अनुच्छेद-4(4), अनुच्छेद- 4(5), अनुच्छेद-4 (6), अनुच्छेद-4 (7), अनुच्छेद-4 (8) के अनुसार सम्पन्न होंगे.

3. प्राथमिक स्तर

प्रत्येक मतदान बूथ स्तर पर एक प्राथमिक इकाई होगी. इस प्राथमिक इकाई का गठन चुनाव वाले क्षेत्र के संबंधित इकाई अध्यक्ष के निर्देश से होगा. प्राथमिक इकाई निम्नलिखित अनुच्छेद-(10) (जे) के अनुसार चुनाव होने जा रहे क्षेत्र के पंजीकृत सभी सदस्य को मिलकर गठित करेंगे. प्रत्येक प्राथमिक इकाई का एक संयोजक होगा, जिसे प्राथमिक इकाई का निर्वाचन मंडल चुनेगी और जहां प्राथमिक इकाई के सदस्यों की संख्या 3 से कम होगी, इकाई के संयोजक की नियुक्ति संबंधित राज्य अध्यक्ष करेंगे. संयोजक के पास तब तक कोई विशेष अधिकार नहीं होगा जब तक राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा नियुक्त संयोजक को विशेष अधिकार आवंटित नहीं हो जाते. ये प्राथमिक स्तर पर पार्टी के कामकाज में आमतौर पर तालमेल बिठाएंगे.

4. स्थानीय निकाय

स्थानीय निकाय इकाई की परिधि के अंतर्गत आते हैं :

(क) नगरपालिका या नगर निगम (वार्ड सभा ) और

(ख) ग्राम स्तर (ग्राम सभा)

स्थानीय निकाय का गठन स्थानीय निकाय के संबंधित अध्यक्ष के निर्देश पर होगा और इस इकाई के अंतर्गत सभी पंजीकृत सदस्य होंगे. स्थानीय निकाय इकाई के सदस्य हर 3 महीने में एक बार बैठक करेंगे.

संगठनात्मक और प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए ये होंगे (1) एक स्थानीय निकाय कार्यकारी सदस्य जिसमें स्थानीय निकाय के पदाधिकारी शामिल होंगे और (2) प्रत्येक प्राथमिक इकाई के संयोजकों का समूह स्थानीय निकाय सलाहकार समिति, उस स्थानीय निकाय द्वारा गठित दूसरी पार्टी की कई इकाई के अध्यक्षों और एक सदस्य राज्य कार्यकारी समिति से होगा. स्थानीय निकाय कार्यकारी समिति और स्थानीय निकाय सलाहकार समिति की 3 महीने में एक बार बैठक होगी.

स्थानीय निकाय इकाई में, एक अध्यक्ष और एक महासचिव होगा। इन पदाधिकारियों का या तो बहुमत से संबंधित निर्वाचन मंडल द्वारा स्वीकार या चयन होगा। या तो अध्यक्ष या महासचिव महिला होगी, अध्यक्ष और महासचिव के अधिकारों और कर्तव्यों का अनुच्छेद-13 में उल्लेख है. इसके अतिरिक्त पदाधिकारियों के कार्य स्थानीय निकाय स्तर तक सीमित किए जाएँगे और नीचे (अनुच्छेद (10-जे में वर्णित कार्यों के अतिरिक्त, स्थानीय निकाय स्तर पर गतिविधियों को व्यवस्थित करने, समन्वय बनाने और सार्वजनिक मुद्दों को उठाने पर जोर होगा. स्थानीय शहरी क्षेत्र में एक से अधिक प्राथमिक इकाई को प्रभावित करने वाले मुद्दे भी होंगे।

5. विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र

एक विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित अध्यक्ष के निर्देश पर एक इकाई गठित की जाएगी. इसमें सभी सदस्य पंजीकृत होंगे. विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के सदस्यों और इसके निर्वाचन मंडल की साल में एक बार अलग से बैठक होगी. संगठनात्मक और प्रशासनिक प्रयोजनों के लिए (1) विधानसभा कार्यकारी समिति होगी, जिसमें इसी के पदाधिकारी होंगे और इसी की अपनी सलाहकार समिति भी होगी, जिसमें हर विधानसभा क्षेत्र का पार्टी अध्यक्ष और पार्टी इकाई के पदाधिकारी होंगे.

साथ ही, इसमें राज्य कार्यकारी समिति का एक सदस्य नियुक्त होगा. (2) विधानसभा कार्यकारी समिति और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का एक अध्यक्ष या कई उच्च पदाधिकारी होंगे, जिन्हें समय-समय पर राज्य कार्यकारी समिति नियुक्त करेगी.

विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र सलाहकार समिति की प्रत्येक स्थानीय निकाय इकाई में अध्यक्ष समूह और अन्य पार्टी इकाई में विधानसभा क्षेत्र से एक सदस्य नियुक्त होगा. विधानसभा क्षेत्र कार्यकारी समिति और विधानसभा क्षेत्र सलाहकार समिति की तीन महीने में कम से कम एक बार बैठक होगी.

विधानसभा निर्वाचन इकाई में एक अध्यक्ष और दो ऐसे उच्च अधिकारी होंगे, जिनका समय-समय पर राष्ट्रीय कार्यकारी समिति से चयन होगा. यही महासचिवों और सचिवों को भी चुनेगी. ये पदाधिकारी संबंधित निर्वाचक मंडल द्वारा बहुमत के मत से स्वीकार या चयनित होंगे. पदाधिकारियों में 50 प्रतिशत महिलाएं होंगी.

अनुच्छेद-13 के अंतर्गत अध्यक्ष, महासचिवों और सचिवों की शक्तियों और कर्तव्य के विवरण हैं. इसके अलावा, विधानसभा निर्वाचन इकाई के कार्यों को विधानसभा स्तर तक ही सीमित किया गया है. इसी तरह निम्नलिखित अनुच्छेद-(10)(जे) का जिक्र है. इसमें विधानसभा क्षेत्र में संगठन और उसमें तालमेल सम्बन्धी गतिविधियां और जन समस्यायों को उठाने पर ज़ोर दिया गया है.

6. संसदीय निर्वाचन क्षेत्र

संबंधित संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के अधीन संबंधित अध्यक्ष के निर्देशों से संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में एक इकाई गठित होगी और इसके अंतर्गत पार्टी के सभी पंजीकृत सदस्य होंगे और इनके निर्वाचन मंडल की साल में एक बार अलग से बैठक होगी.

संगठनात्मक और प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए, (1) एक संसदीय निर्वाचन कार्यकारी समिति होगी, जिसके अपने पदाधिकारी होंगे और (2) सलाहकार समिति होगी जिसके अध्यक्ष प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र और दूसरी संसदीय स्तर की पार्टी इकाई के अध्यक्ष होंगे. राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा नियुक्त एक सदस्य भी इसमें होगा. समिति की हर तीन महीने में कम से कम एक बार बैठक होगी.

संसदीय निर्वाचन क्षेत्र इसमें एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष, दो या इससे ज्यादा महासचिव और सचिव होंगे. जिन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी समिति नियुक्त करेगी. इसके पदाधिकारी आम राय से संसदीय समिति के निर्वाचक मंडल से बहुमत के आधार पर स्वीकार या निर्वाचित होंगे. पदाधिकारियों में 50 प्रतिशत महिलायें अवश्य होंगी.

अनुच्छेद-13 में उल्लिखित अध्यक्ष, महासचिव और सचिव की शक्तियां और कर्तव्य दिए गये हैं. इसके अलावा संसदीय निर्वाचन क्षेत्र इकाई के कार्यों का भी जिक्र है जो संसदीय निर्वाचन क्षेत्र स्तर तक सीमित होगा. इसके अलावा निम्नलिखित अनुच्छेद- (10)(जे) में कामकाज का उल्लेख है. साथ ही इसमें संसदीय क्षेत्र स्तर पर पार्टी को संगठित करने और तालमेल का भी जिक्र है. संसदीय क्षेत्र में एक से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों की जन समस्या उठाने का भी जिक्र है.

7. राज्य स्तर

राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश से राज्य में इकाई का गठन होगा और पंजीकृत सदस्यों में से सभी राज्यों में पार्टी इकाई का गठन होगा. इसमें राज्य इकाई के सदस्य और उसके चयन मंडल के भी सदस्य होंगे. राज्य इकाई के सदस्यों और इसके चुनाव क्षेत्र की कम से कम 6 महीने में अलग से बैठक बुलाई जाएगी.
संगठनात्मक और प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए (1) एक राज्य कार्यकारी समिति होगी, जिसमें राज्य इकाई के पदाधिकारी होंगे, (2) राज्य सलाहकार समिति होगी, जिसमें प्रत्येक संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के अध्यक्ष और राज्य स्तर की पार्टी इकाइयों के अध्यक्ष और दूसरी पार्टी इकाइयां होंगी. इसमें 3 सदस्यों को राष्ट्रीय कार्यकारी समिति नियुक्त करेगी. राज्य कार्यकारी समिति और राज्य सलाहकार समिति की 3 महीने में एक बार बैठक बुलाई जाएगी. राज्य इकाई में एक अध्यक्ष और 2 उपाध्यक्ष होंगे. इसमें वरिष्ठ सदस्यों को राष्ट्रीय कार्यकारी समिति समय-समय पर नियुक्त करेगी. इसमें महासचिवों और सचिवों को यही समिति नियुक्त करेगी. राज्य इकाई के पदाधिकारियों को निर्वाचन मंडल चुनेगी या आम राय से इनकी नियुक्ति को अपनी मंजूरी देगा. पदाधिकारियों में 30 प्रतिशत महिलायें अवश्य होंगी
अनुच्छेद-13 में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महासचिव और सचिव के अधिकार और कर्तव्य के उल्लेख हैं. इसमें राज्य इकाई के कार्यो के भी जिक्र हैं. यह राज्य की सीमा तक ही रहेगा. इसके अलावा निम्नलिखित अनुच्छेद 10(जे) में वर्णित कार्यो, संगठन बनाने और राज्य स्तर पर तालमेल संबंधी कार्यक्रम भी हैं, जो राज्य के एक या एक से ज्यादा सार्वजनिक मुद्दों को पार्टी पदाधिकारी उठाएंगे.

8. राष्ट्रीय स्तर

अपने आरंभिक दिनों से पार्टी में राष्ट्रीय स्तर का एक अध्यक्ष और पार्टी के पंजीकृत सदस्यों का एक समूह होगा. राष्ट्रीय इकाई के सदस्यों और चयन मंडल की साल में कम से कम एक बार अलग से बैठक होगी.
इसके संगठनात्मक और प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए (1) एक राष्ट्रीय कार्यकारी समिति होगी, जिसमें राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी और नीतिनियंता होंगे और (2) एक राष्ट्रीय सलाहकार समिति होगी, जिसमें प्रत्येक राज्य के अध्यक्ष होंगे और निम्नलिखित में से राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा नियुक्त 3 सदस्य भी होंगे:

(क) ऐसे क्षेत्रों से विशेषज्ञ जिन्हें वे उपयुक्त मानते हैं

(ख) देश के प्रतिष्ठित लोग

(ग) समाज के वंचित वर्गों के लोग

राष्ट्रीय कार्यकारी समिति और राष्ट्रीय सलाहकार समिति की हर 6 महीने में एक बार बैठक होगी.
राष्ट्रीय कार्यकारी समिति में एक अध्यक्ष और 5 उपाध्यक्ष,11 महासचिव (उत्तर, पूर्व, पश्चिम, दक्षिण होगा और भारत के केंद्रीय क्षेत्र का कम से कम एक-एक प्रतिनिधि होगा), या राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की ओर से निर्धारित इसी तरह की संख्या में पदाधिकारी समय-समय पर रखे जायंगे, प्रत्येक राज्य के लिए सचिव होगा जो समय-समय पर राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा नियुक्त किया जा सकता है. और सचिव की मदद के लिए एक संयुक्त सचिव होगा.
पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय में पदाधिकारी या तो आम राय से शामिल किये जाएंगे या राष्ट्रीय चयन मंडल द्वारा चुने जायेंगे. इसमें 30 प्रतिशत महिलाएं अवश्य होंगी. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, सचिव और संयुक्त सचिवों के अधिकारों और कर्तव्यों को अनुच्छेद-13 में वर्णित किया गया है. इसके अलावा, अनुच्छेद-4 (10)(जे) में वर्णित राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के कार्यक्रम का भी जिक्र होगा; जो निम्नलिखित हैं :

• उपाध्यक्षों और महासचिवों के कर्तव्य और जिम्मेदारियों का निर्धारण किया गया है. इनके कार्यों और जिम्मेदारियों में शामिल होंगे (1) कोष और वित्तीय जिमेदारियां (2) मानव संसाधन प्रबंधन, जो कार्यक्रमों की समीक्षा, शिकायत निपटान और अनुशासन कायम करेंगे, (3) वैचारिक जिम्मेदारियां, (4) एक या एक से अधिक विशिष्ट राज्यों सहित पार्टी की प्रगति, (5) आन्तरिक प्रशिक्षण (6) बुनियादी ढांचे और समर्थन संबंधी प्रबंधन, (7)मीडिया प्रबंधन (8) सभी स्तरों पर आन्तरिक लोकतंत्र सुनिश्चित करना(9) सरकार के साथ रिश्ते आदि.

• राष्ट्रीय परिषद द्वारा उठाए गए फैसले का निष्पादन.

• राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का संयोजन, तालमेल संबंधी कामकाज और निगरानी. यदि जरूरी हुआ तो देश में विभिन्न स्तरों पर पार्टी के कामकाज पर निगरानी.

• देश में पार्टी के उद्देश्यों और सार्वजनिक मुद्दों से संबंधित सभी गतिविधियों को पूरा करने की जरूरत और जन मुद्दों पर नजर.

• पार्टी के लेखाखातों को दुरुस्त रखने और पार्टी के हर स्तर पर खातों की उचित व्यवस्था

• पार्टी के निर्णय लागू करने के लिए दल या समिति का गठन या पुनर्गठन.

• पार्टी में सभी स्तरों पर कोषाध्यक्षों की नियुक्ति और सलाह के लिए उन्हें आमंत्रित करना.

• इस संविधान के अंतर्गत नियमावली बनाना और इन्हें अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रीय कार्यकारी समिति को सौपना.

किसी अंग/समिति/ दल को प्रारंभिक इकाई के लिए चयन का अर्थ है स्थानीय निकायों, राज्य विधानसभाओं या संसदीय चुनाव के लिए उम्मीदवारों का चयन करना.

• किसी अंग/समिति/ प्राधिकारियों की अनुपस्थिति में किसी अंग/ समिति/प्राधिकारियों को ऐसी सभी शक्ति के लिए अधिकृत करना.

• यहाँ व्यक्त प्रावधानों में ऐसे किसी भी अंग/दल/समिति के किसी भी पदाधिकारी या सदस्य को हटाना या किसी अंग/ समिति/ दल को स्थगित/ भंग करना.

9. अन्य इकाई
समय-समय पर ज़रूरी होने की स्थिति में राष्ट्रीय कार्यकारी समिति ऐसी दूसरी कई इकाई गठित कर सकती है. पार्टी हर इकाई में एक अध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा समय-समय पर एक या इससे ज्यादा संख्या में उच्च पदाधिकारी या सचिव रख सकती है. ऐसी सभी इकाई की साल में एक बार बैठक होगी.

10. सामान्य

(क) यहाँ दी गयी विशिष्ट समितियों में से कुछ समितियां राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा गठित की जा सकती हैं. ये पार्टी में विभिन्न स्तरों पर गठित हो सकती हैं; जैसे प्रशिक्षण समिति (प्रचार-सदस्यों को प्रशिक्षण मुहैया करना), विवाद निपटान और अनुशासन समिति (सदस्यों के बीच विवाद निपटाने और मूल्यों व अनुशासन क्रियान्वित करना), पारदर्शी समिति (पारदर्शी कामकाज सुनिश्चित करना), आदि.

(ख) राष्ट्रीय कार्यकारी समिति सदस्यों की विभिन्न विधायी समितियां गठित करके विभिन्न विधायी अंग चुनेंगी जैसे विधानसभायें, स्थानीय सरकारें और संसद, जो विभिन्न स्तरों पर कार्यकारी समितियों को सलाह दे सकती है.

(ग) (सामान्य परिषद
इसकी प्रत्येक इकाई में सभी सदस्य पंजीकृत सदस्य होंगे और प्रत्येक स्तर पर साल में कम से कम एक बार इनकी बैठक हुआ करेगी और बहुमत के आधार पर फैसले लिए जाएँगे. इसे मानना उसकी कार्यकारी समिति के लिए बाध्यकारी होगा.

D. Executive Committees
The Executive Committee at each level, shall be the executive and decision-making body at that level and it shall act as per majority vote.

(घ) कार्यकारी समितियां
हर स्तर की कार्यकारी समितियों का कार्यकारी होगा और उस स्तर पर फैसले लिए जाएँगे और ये बहुमत के आधार पर होंगे.

F. राष्ट्रीय परिषद्
एक राष्ट्रीय परिषद् होगी, जिसमें सभी संसदीय क्षेत्र की इकाई के अध्यक्ष होंगे. सभी राज्य इकाई के अध्यक्ष, महासचिव और पदाधिकारी होंगे. ये एक कैलेण्डर वर्ष में कम से कम एक बार मिलेंगे. राष्ट्रीय परिषद् एक साल में कम से कम एक बार अवश्य बैठक करेगी. राष्ट्रीय परिषद् की बैठक राष्ट्रीय परिषद् बुलायगी. उसके फैसले बहुमत के आधार पर लिए जाएँगे और राष्ट्रीय कार्यकारी और पार्टी को मान्य होंगे.

(ङ) राष्ट्रीय सलाहकार समिति
एक राष्ट्रीय सलाहकार समिति होगी, इसका समय-समय पर गठन होगा और इसकी समयावधि राष्ट्रीय कार्यकारी समिति तय करेगी. इसमें पार्टी के बिना चुने वरिष्ठ सदस्य और एक नीतिनियंता शामिल होंगे. इस निकाय का उद्देश्य नियमित आधार पर राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की सलाह से समिति को सहयोग और परामर्श होगा.

(नीति-सह-विचारधारा नेतृत्व समिति

यह अंग राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा गठित होगा और समय-समय पर यह राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा भंग और पुनर्गठित होगी. इसके अंतर्गत शामिल हैं:

(अ) पार्टी द्वारा समय-समय पर यथासंभव रणनीति तैयार करने के कार्य किऐ जायेंगे.

(ब) पार्टी के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए किसी भी मुद्दे या किये जाने वाले कार्यक्रम पर विचार और निर्णय करना।

(स) इस समिति द्वारा आमराय से सहमति से रणनीति बनाने के बाद संबंधित राज्य और राष्ट्रीय नेतृत्व समूह से

लागू करने से पहले मंजूरी लेना.

इकाइयों के कामकाज

हर इकाई के इसे कार्य जो सम्बन्धित इकाई स्तर तक सीमित होंगे और जब तक कोई और बात ना हो, इसके कार्य हैं –

(क) अपनी विभिन्न समस्याओं और इनके समाधान खोजने वालो की सहायता करना/p>

(ख) इसकी सदस्यता और कोष संग्रह प्रयासों के साथ पार्टी की सहायता करना.

(ग) गतिविधियों का रिकॉर्ड सहेजना

(घ) संबंधित कार्यकारी समिति द्वारा कार्यों को समय- समय पर अंजाम देना

(ङ) पार्टी के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए किसी भी मुद्दे या कार्यक्रम पर विचार कर निर्णय लेना

(च) आवश्यकता के अनुसार ऐसी टीमों का गठन करना और उन्हें उचित कार्य के अनुरूप तैयार करना.

अनुच्छेद 5-कार्यालय पदाधिकारियों और अन्य पदाधिकारियों के लिए सामान्य प्रावधान

1. पार्टी में प्रत्येक स्तर के पदाधिकारी

राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के सदस्यों के अतिरिक्त पार्टी के सभी पदाधिकारी जो मनोनीत, नियुक्त या चुने गये हैं, इनमें वैकल्पिक मनोनयन, नियुक्ति या चुनाव द्वारा आये हैं, वे औपचारिक स्वीकृति से अपने स्थान पर पहुचे हैं और इनका राष्ट्रीय कार्यकारी समिति से अनुमोदन हुआ है.

1. पार्टी में प्रत्येक स्तर के पदाधिकारी

राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा इसे किसी मनोनयन, नियुक्ति या चुनाव नामंजूरी या मंजूरी से मना किया गया हो, ऐसे सदस्य की नियुक्ति मान्य नहीं होगी और वे वैकल्पिक मनोनयन, नियुक्ति या चुनाव से एक बार फिर पद पर पहुंच जायंगे. इंकार या अस्वीकृत संबंधी किसी ऐसे निर्णय पर राष्ट्रीय शिकायत समिति में अपील करनी होगी, जिसका फैसला सभी पक्षों को स्वीकार होगा.

2. विचारक

राष्ट्रीय कार्यकारी समिति समय-समय पर अपने विचारक को वरिष्ठ सक्रिय सदस्य के रूप में चुनेगी. ये विचारक राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की संतुष्टि तक पद पर बने रहेंगे. विचारक पार्टी और उसके सदस्यों के सामान्य पथ-प्रदर्शक होंगे और राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की बैठकों में मतदान कर सकेंगे.

कोषाध्यक्ष

राष्ट्रीय कार्यकारी समिति में एक कोषाध्यक्ष नियुक्त होगा. यह पार्टी की प्रत्येक राज्य इकाई में भी होगा जो निम्नलिखित कार्यों में अपनी जिम्मेदारियां सम्भालेगा.

आरंभिक अस्थाई नियुक्ति-यद्यपि किसी भी प्रावधान से हट के

(1) पार्टी की राष्ट्रीय इकाई के पहले आन्तरिक चुनाव तक वह पार्टी के वजूद में आने के दो साल से ज्यादा तक कार्य नहीं करेगा और यह

(2) इसके बाद किसी भी समय पार्टी की नयी इकाई के गठन के बाद ये सक्रिय हो जायेगी.

(1) पंजीकरण तक पार्टी के राष्ट्रीय स्तर से नीचे के सभी स्तरों पर अंतरिम आधार पर पदाधिकारी की नियुक्ति आम राय से होगी. (2) राष्ट्रीय कार्यकारी समिति पार्टी के संविधान के बाद पार्टी के संस्थापक सदस्यों की आम राय से नियुक्ति होगी.

(5. इस उद्देश्य के लिए संस्थापक सदस्य वे लोग होंगे, जिनका शपथ पत्र भारत के निर्वाचन आयोग में उसके पंजीकरण के समय पार्टी को मिल चुका है.

6. यह स्पष्ट है कि शुरू के दिनों में (1) अनुच्छेद-4 (4) के अनुसार, पदाधिकारी पार्टी की निम्नलिखित इकाइयों में नियुक्त होंगे. ऐसी नियुक्ति के समय इनके पदों को स्पष्ट नहीं किया गया है और (2) अनुच्छेद-4 (4) के अंतर्गत नियुक्ति की शक्ति के अंतर्गत कोई भी कारण हो, इनके अधिकार वापस लिए जा सकते हैं.

7. राष्ट्रीय कार्यकारी समिति पार्टी के सभी स्तरों पर पहले आन्तरिक चुनाव में सभी जरूरी कदम उठाएगी. इसके गठन की अवधि तय होगी, जो तार्किक और व्यावहारिक अवश्य होगी. शुरू के दो वर्षों के दौरान किसी भी स्थिति में आंतरिक चुनाव होंगे.

अनुच्छेद 6 - विवाद समाधान और अनुशासन

1. राष्ट्रीय शिकायत समिति एक राष्ट्रीय शिकायत समिति होगी. इसमें 5 सदस्य होंगे, जिनकी नियुक्ति बहुमत के आधार पर राष्ट्रीय परिषद् करेगी. समिति सभी विवादों, मुद्दों और शिकायतों को हल करेगी, ऐसी व्यवस्था इस संविधान में विशेष रूप से शामिल है और सभी अपीलों को भी इसी के मुताबिक निपटाया जाएगा. राष्ट्रीय शिकायत समिति सभी सदस्यों और पार्टी के लिए अंतिम और बाध्यकारी होगी.

2. इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय शिकायत समिति विवाद निपटान और अनुशासनात्मक समितियों का गठन उचित समय पर कर सकती है. समिति सभी अन्य विवादों, समस्याओं, संघर्षों को हल करने का जिम्मेदारी उठाने के साथ ही मूल्यों और अनुशासन को लागू करेगी. इसका उल्लेख राष्ट्रीय शिकायत समिति के प्रस्ताव में नहीं है.

3. इस संविधान के दस्तावेजों की विषय-वस्तु के विवरण के अलावा आगे की अनुशासनात्मक प्रक्रियाओं को समय-समय पर राष्ट्रीय कार्यकारी समिति अपनाएगी.

4. प्राथमिक इकाई स्तर के अलावा पार्टी अपने महासचिवों में से एक को पार्टी में अनुशासन और मूल्यों को कायम रखने के लिए जिम्मेदारी सौपेगी. पार्टी की वेबसाइट में इसका उल्लेख है.

5. पार्टी के सभी सदस्य आचार संहिता और पार्टी के भीतर अनुशासन कायम रखने संबंधी अन्य नीतियों का पालन करेंगे. यह राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा समय-समय पर निश्चित किया जायेगा.

6. अनुच्छेद-6 में उल्लिखित या सभी कार्यवाही के अंतर्गत पार्टी 15 दिनों की लिखित सूचना पर किसी भी संबंधित सदस्य या सदस्यों को नोटिस जारी करेगी. जिसमें सभी सम्बद्ध आरोप और विस्तृत विवरण शामिल होंगे और इसे पार्टी की वेबसाइट पर भी डालकर सार्वजनिक किया जायेगा. संबंधित सदस्य या सदस्यों को लिखित जवाब देने का अधिकार होगा और 15 दिनों की नोटिस अवधि के भीतर इस पर सुनवाई होगी. इस 15 दिनों की अवधि के समाप्त होने के बाद पार्टी अपना फैसला सुनाएगी.

7. अपील

(क) ऐसे सदस्य जिनकी (1) सदस्यता सक्रिय से सामान्य के तहत समीक्षा हो रही हो या उसे निरस्त किया गया हो या निष्कासित किया गया हो या हटाया गया हो या अनुच्छेद-3 (8) या (9) या उक्त के अंतर्गत समीक्षा की गई हो, तो उन्हें नोटिस जारी की जायेगी और उन्हें अपना पक्ष रखने का अधिकार होगा (2) ऐसे व्यक्ति को राष्ट्रीय शिकायत समिति में इस फैसले पर अपील करने का अधिकार होगा. इस मामले में समिति का फैसला अंतिम और सभी पर बाध्यकारी होगा.

(ख) किसी भी विवाद निपटान और अनुशासनात्मक समितियों पर कोई भी फैसला राष्ट्रीय शिकायत समिति में अपील के माध्यम से किया जाएगा.

8. इस अनुच्छेद-VI के तहत सभी कार्यवाही में कामकाज और प्राकृतिक न्याय की निष्पक्षता के सामान्य सिद्धांतों का पालन होगा.

अनुच्छेद 7– कामकाज, चुनाव और निर्णय लेने की प्रक्रिया के तहत नियमों के मुख्य बिन्दु ; बैठक में कोरम, सूचना और निर्णय

1. बैठक के संचालन, कोरम, नोटिस और दूसरी गतिविधियां राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा समय-समय पर तय किया जायेगा. पार्टी के सभी फैसले, उसके अंग और उसकी इकाई के मामले में मौजूदा सदस्यों के बहुमत के आधार पर होगा और राष्ट्रीय परिषद् के फैसलों के अलावा राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा संबंधित बहुमत के आधार पर होगा. पार्टी की किसी इकाई या दूसरे अंगों के दिये फैसलों पर समिति के फैसले लागू होंगे.

2. इसके विपरीत, यहां कुछ भी होते रहने के बावजूद, पार्टी हर स्तर पर अपनी सभी गतिविधियों, बैठकों और फैसलों के रिकॉर्ड रखेगी. यह रिकॉर्ड मुख्य कार्यालय में हर स्तर पर सुरक्षित रखा जायेगा. इसके सभी रिकॉर्डो की कॉपियां राष्ट्रीय स्तर पर इलेक्ट्रोनिक डेटाबेस में सुरक्षित रहेगा.

3. अनुच्छेद-VII (2) के अनुसार, पार्टी द्वारा रखे गए रिकॉर्ड किसी भी सदस्य द्वारा राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा तैयार किए गए जाँच नियमों के अनुसार निरीक्षण के लिए उपलब्ध रहेगा।

4. पार्टी के भीतर सभी मतदान / चुनाव गुप्त मतपत्र के माध्यम से होंगे, जो इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेस के जरिए मतदान करने तक सीमित नहीं है (इसे एक बैठक में मत के रूप में माना जाएगा). ये प्रक्रिया की विशेषताओं को राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा समय-समय पर निर्धारित किया जाएगा.

इसके विपरीत किसी भी प्रावधान के बावजूद,

(क) कोई भी सक्रिय सदस्य किसी भी स्तर पर, कोषाध्यक्ष (जो एक नियुक्त पद होगा और निर्वाचित नहीं होगा) को छोड़कर, पार्टी के पदाधिकारी के कामकाज के लिए नामांकन और या चुनाव के लिए स्वतंत्र है।

(ख) निर्वाचित पदाधिकारी के अतिरिक्त और इस संविधान के विपरीत किसी भी कामकाज के बावजूद, राष्ट्रीय कार्यकारी समिति ऐसे अन्य पदाधिकारियों को पद पर बिठा सकती है जिनके पद, संख्या बल और जिम्मेदारियों को निर्धारित किया और लिखित रूप में दर्ज किया जाएगा.

(ग) सलाहकार और कोषाध्यक्ष के पद छोड़कर, पार्टी के सभी अंगों के लिए सभी पदाधिकारियों की अवधि, (जिनकी अवधि की सीमा नहीं होगी), तीन साल की होगी और कोई भी सदस्य दो पद से अधिक के लिए एक ही कार्यालय में नहीं रहेगा, यह स्पष्ट किया जा रहा है कि अनुच्छेद 5 (4), अर्थात अस्थाई नियुक्ति के तहत कार्यालय की अवधि तीन साल की अवधि की गणना में शामिल मानी जाएगी।

(घ) पार्टी में नियमित आंतरिक चुनाव होंगे, जो हर तीन साल में एक बार सभी स्तरों पर होंगे और अपने पदाधिकारी चुनने के लिए आमंत्रित होंगे.

अनुच्छेद 8 - पार्टी कोष और बहीखाते

1. पार्टी प्रत्येक स्तर / यूनिट पर, प्राथमिक यूनिट स्तर को छोड़कर एक बैंक खाता खुलेगा और ऐसी इकाई में योगदान, आय, व्यय आदि सभी वित्तीय लेन-देन रिकॉर्ड के लिए अलग-अलग बही खाते बनाये जायेंगे।

2. राज्य या राष्ट्रीय स्तर पर प्रत्येक कार्यकारी समिति, प्रत्येक स्तर के लिए, कम से कम दो सदस्यों को खाता खोलने के लिए बैंक खातों और एक सदस्य इन्हें संचालित करने के लिए नामित करेगी।

3. राष्ट्रीय कार्यकारी समिति प्रत्येक राज्य इकाई ("राज्य कोषाध्यक्ष") और राष्ट्रीय इकाई ("राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष") के लिए खजांची भी नियुक्त करेगी, जिसका प्राथमिक कार्य बहीखाते उचित तरह से रखने, कोष स्थापित करने और भर्ती और अनुपालन सुनिश्चित करने का होगा।

4. प्रत्येक स्तर पर बहीखाते रखने के लिए नामित सदस्य, सभी वित्तीय रिकॉर्ड, विवरण और खातों की लिखित जानकारी बेहतर तरीके से रखेगा और संबंधित राज्य कोषाध्यक्ष के साथ इसके सभी विवरण साझा करेगा.

5. राज्यों के कोषाध्यक्ष की समग्र जिम्मेदारी इस तरह होगी- (i) संबंधित राज्य इकाई स्तर पर सभी वित्तीय रिकार्ड्स और बहीखातों को व्यवस्थित करना, (ii) ऐसी राज्य इकाई में वित्तीय और बहीखातों को एक समान कार्य करना और (iii) राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष के साथ इस तरह की सारी जानकारी और रिकॉर्ड साझा करना होगा, ताकि राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष को पूरी पार्टी के बहीखातों और राष्ट्रीय इकाई के साथ राज्यों की वित्तीय इकाइयों का तालमेल बिठाया जा सके.

6. राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष की संपूर्ण जिम्मेदारियों में (i) अखिल भारतीय स्तर पर सभी वित्तीय रिकॉर्ड और बहीखातों को व्यवस्थित करना और (ii) राष्ट्रीय इकाई स्तर पर वित्तीय और बहीखातों को एक समान ठीक रखना होगा।

7. पार्टी की प्रत्येक इकाई, अपनी कार्यकारी समिति के माध्यम से, प्रत्येक स्तर पर, पार्टी के कोष के उपयोग नीति के अनुसार, पार्टी के कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे स्तर पर बनाए गए पार्टी के बैंक खाते में उपलब्ध धन का उपयोग कर सकती है। इसके सभी उपयोग व्यवस्थित और उस स्तर पर सभी सदस्यों के पारदर्शी और पदक्रम के अनुसार सभी पार्टी इकाइयों के साथ तालमेल बिठायेंगे।

8. राष्ट्रीय कार्यकारी समिति प्रत्येक स्तर पर पार्टी की सहायता करने के लिए कोष को खर्च करने संबंधी नीति तैयार करेगी ताकि संबंधित इकाइयों के स्तरों पर अपने बैंक खातों में पार्टी के उपलब्ध धन का उपयोग कर सके। कोष के इस्तेमाल संबंधी नीति को जल्द से जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा।

9. पार्टी के सभी दान या वित्तीय योगदान कानूनसम्मत तरीके से किये जाएंगे और इन्हें चेक, इलेक्ट्रॉनिक साधनों और औपचारिक वार्तालाप के साधनों द्वारा प्राप्त किया जाएगा। सभी दान और वित्तीय योगदान पार्टी के बहीखातों में दर्ज किए जाएंगे और पार्टी की मौजूदा पारदर्शी नीति के अनुसार, पार्टी द्वारा साझा किया जाएगा, जो राष्ट्रीय कार्यकारी समिति तैयार करेगी।

10. सभी स्तरों पर वार्षिक लेखा-जोखा तैयार किया जायेगा और राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा इसे अनुमोदन के बाद राष्ट्रीय परिषद में अवश्य प्रस्तुत किया जायेगा.

अनुच्छेद 9 - पार्टी के संविधान में संशोधन प्रक्रिया

1. पार्टी संविधान में कोई भी संशोधन राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा किया जाएगा और मतदान में हिस्सा लेने वाले ज़्यादातर सदस्यों द्वारा पारित संकल्प के माध्यम से इस तरह के संशोधन करने के मकसद के लिए आयोजित राष्ट्रीय महापरिषद की बैठक आयोजित की जाएगी। संविधान में हल्के-फुल्के या अन्य मामूली सुधार के लिए राष्ट्रीय महापरिषद में बहुमत ज़रूरी होगा.

2. पार्टी संविधान में किसी भी संशोधन के सम्बन्ध में कम से कम 30 दिन पहले पार्टी वेबसाइट पर संशोधन की जानकारी के साथ ही राष्ट्रीय महापरिषद् की निर्धारित बैठक बुलाई जाएगी. पार्टी की वेबसाइट पर सूचना पड़ जाने के बाद इसकी निजी जानकारी देना ज़रूरी नहीं होगा.

अनुच्छेद 10- विलय, विखंडन और भंग संबंधी प्रावधान

1. राष्ट्रीय परिषद् की एक बैठक 30 दिन में बुलाकर पहले पार्टी के विलय, विखंडन और भंग संबंधी सूचना जारी करने के किसी भी प्रस्ताव पर विचार किया जायेगा.

2. राष्ट्रीय परिषद् के दो-तिहाई मतों द्वारा स्वीकृत और विलय, विखंडन या भंग संबंधी किसी भी प्रस्ताव को राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के दो-तिहाई से ज्यादा मतों की मंजूरी ज़रूरी होगी.

अनुच्छेद 11- जन प्रतिनिधित्व कानून, 1951 के अंतर्गत अनुच्छेद-29 अ (5) के बाध्यकारी प्रावधान

“लिबरल पार्टी ऑफ़ इंडिया” कानून द्वारा स्थापित भारत के संविधान में भरोसा और निष्ठा रखेगी और समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के सिद्धांतों और भारत की एकता और अखंडता को कायम रखेगी.”

अनुच्छेद 12- कार्यालय में रिक्तियों को भरना

1. अगर ज़रूरी हुआ, तो पार्टी के किसी भी स्तर पर किसी भी पद पर भर्ती राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की ओर से जारी प्रस्ताव को पारित करके किया जाएगा. इसके लिए उस पद की बची अवधि तक ही नियुक्ति का प्रावधान होगा.

2. इस संविधान के अन्य संविधानिक प्रावधान के अनुसार, प्राथमिक इकाई के अतिरिक्त पार्टी की प्रत्येक इकाई का एक अध्यक्ष होगा. पार्टी को यहाँ व्यक्त प्रावधानों से अलग किसी अन्य पद या कार्यालय का प्रावधान नहीं है.

अनुच्छेद 13- अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिवों, सचिवों और संयुक्त सचिवों के अधिकार और कर्तव्य

1. पार्टी इकाई के मुख्य कार्यकारी के रूप में वह अपने महत्वपूर्ण कर्तव्यों का हर स्तर पर निष्पादन करेगा;

2. हर स्तर पर कार्यकारी समिति के निर्णयों के क्रियान्वयन के प्रति ज़िम्मेदार होंगे;

3. अनिर्णीत होने की स्थिति में दूसरा मत शामिल किया जाएगा.

4. पार्टी के कामकाज में सहायता करने के लिए किसी भी समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों को विशिष्ट जिम्मेदारियों के साथ नियुक्त करने और किसी भी व्यक्ति को नियुक्त करने के लिए सदस्य ना होने की शक्ति होगी।

उपाध्यक्ष(क्षों) को इस संविधान में इसके अतिरिक्त निम्नलिखित जिम्मेदारी दी गई है :

1. सभी स्तरों पर अध्यक्ष की सहायता करेंगे और वरिष्ठ उपाध्यक्ष अपनी अनुपस्थिति में अध्यक्ष की जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।

2. इसके अतिरिक्त, प्रत्येक उपाध्यक्ष को ऐसे अन्य कार्यों और जिम्मेदारियों को आवंटित किया जा सकता है जैसा कि समय-समय पर कार्यकारी समिति उपयुक्त माने.

1. एक महासचिव का मुख्य कार्य समय-समय पर पार्टी की बैठकें और संबंधित बैठकों का आयोजन करना होगा, वह इस तरह की बैठकों का रिकॉर्ड रखेगा, पार्टी के इंट्रानेट पर सूचना अपलोड करेगा और सचिव संबंधी अन्य कार्यों पर नजर रखेगा।

2. इसके अलावा, प्रत्येक महासचिव को ऐसे अन्य कार्यों और जिम्मेदारियों को आवंटित किया जा सकता है जो संबंधित कार्यकारी समिति समय-समय पर उपयुक्त माने.

इस संविधान में कहीं और निर्दिष्ट बातों के अलावा सचिव के कर्तव्य इस प्रकार हैं :

1. उनके कर्तव्य महासचिव की हर तरह से मदद करना है.

2. इसके अलावा, प्रत्येक सचिव को ऐसे अन्य कार्यों और जिम्मेदारियों को आवंटित कर सकता है जो संबंधित कार्यकारी समिति समय-समय पर उपयुक्त माने.

इस संविधान में संयुक्त सचिव अन्य बातों के अलावा कहीं और निर्दिष्ट कार्य कर सकते हैं :

1. संयुक्त सचिव ऐसे कार्यों और जिम्मेदारियों को संभालेंगे, जो कार्यकारी समिति समय-समय पर उनके लिए उपयुक्त माने.

संबंधित अध्यक्ष, संबंधित चयन मंडल और संबंधित कार्यकारी समिति पद क्रमानुसार अध्यक्ष, चयन मंडल या कार्यकारी समिति जहाँ जैसी स्थिति हो, उनमें :

I. राष्ट्रीय स्तर

II. एक राज्य स्तर

III. एक संसदीय निर्वाचन क्षेत्र स्तर

IV. एक विधानसभा क्षेत्र स्तर

V. एक स्थानीय निकाय स्तर

पद क्रमानुसार अध्यक्ष या कार्यकारी समिति के निर्णयों/ निर्देशों में किसी भी संघर्ष की स्थिति में उच्च पद का अनुक्रम लागू होगा.

अनुच्छेद 14 - चुनाव प्राधिकार

1. राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा एक स्वायत्त चुनाव प्राधिकरण गठित होगा.

2. चुनाव प्राधिकरण के सदस्य होने के लिए पात्रता मानदंड और चुनाव प्राधिकरण के सदस्यों और / या पदाधिकारी की अवधि का निर्धारण राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा किया जाएगा.

3. चुनाव प्राधिकरण के कार्य निम्नलिखित होंगे :

(क) पार्टी के सभी स्तरों पर आंतरिक चुनाव करना

(ख) वैकल्पिक कार्यालय हेतु पार्टी के उम्मीदवारों का चयन करने के लिए प्राथमिक चुनाव करना

(ग) पार्टी के किसी भी स्तर पर होने वाली किसी भी रिक्ति को भरने के लिए चुनाव आयोजन

(घ) ज़रूरत होने पर चुनाव का आयोजन

4. यदि किसी भी स्तर पर चुनाव के दौरान कोई विवाद है, तो राष्ट्रीय शिकायत समिति से अपील

अनुच्छेद 15 - निर्वाचन मंडल

1. प्राथमिक इकाई में सभी सदस्यों के पते उनके संबंधित चुनाव बूथ के पते सहित रिकॉर्ड करना.

2. स्थानीय निकाय इकाई में संबंधित स्थानीय निकाय क्षेत्र में सभी सदस्यों के दर्ज पते.

3. विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए, संबंधित विधानसभा क्षेत्र के भीतर प्राथमिक इकाइयों और स्थानीय निकाय इकाइयों के सभी पदाधिकारी.

4. संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के सभी पदाधिकारी.

5. राज्य इकाई के लिए संबंधित राज्य क्षेत्र के भीतर संसदीय निर्वाचन इकाई के सभी पदाधिकारी.

6. राष्ट्रीय इकाई के लिए, राष्ट्रीय कार्यकारी समिति को छोड़कर, राज्य इकाई के सभी पदाधिकारी.

अनुच्छेद 16 उम्मीदवारों का चयन

समय-समय पर राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा अपने महत्वपूर्ण सदस्यों के लोकतंत्रिक तरीके से स्थानीय, राज्य स्तरीय, राष्ट्रीय विधायिकाओं के जरिये पार्टी के उम्मीदवारों का चयन होगा, लेकिन उन्हें सम्भावित उम्मीदवारों और दूसरे उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार करने की जिम्मेदारी सौपी जाएगी.

अनुच्छेद 17 – चुनौती देने और वापस बुलाने संबंधी प्रस्ताव

1. प्रत्येक स्तर पर सदस्यों को चयन मंडल की विधिवत बैठक में 2/3 मतों से किसी भी निर्वाचित पदाधिकारी को वापस बुलाना

2. हालांकि, किसी भी पदाधिकारी को बुलाने के लिए चयन मंडल की कोई बैठक नहीं बुलाई जाएगी. या तो (i) राष्ट्रीय अध्यक्ष की विशेष स्वीकृति के बिना या (ii) उस स्तर के लिए चयन मंडल के कम से कम 10% लोगों की राय पर ऐसी बैठक बुलाई जा सकती है.

अनुच्छेद 18 - लिंग और सामाजिक समानता

1. पार्टी जाति, धर्म, पंथ आदि के आधार पर भेदभाव रहित नीति का पालन करेगी और सभी स्तरों पर महिलाओं के समक्ष और अन्य वंचित लोगों को उचित और निष्पक्ष प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रयास करेगी.

2. लैंगिक और सामाजिक समानता सुनिश्चित करने के लिए पार्टी सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएगी.

अनुच्छेद 19 - नियम और विनियम

1. राष्ट्रीय कार्यकारी समिति पार्टी के बेहतर कामकाज के लिए उचित नियम और विनियम बनाएगी.

2. राष्ट्रीय कार्यकारी समिति को पार्टी के सभी सदस्यों और पदाधिकारियों के लिए उचित आचार संहिता बनाएगी

अनुच्छेद 20- बैठकें

पार्टी की विभिन्न इकाइयां नियमित रूप से मुलाक़ात करेंगी, जैसा कि राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा समय-समय पर तय किया गया है. ऐसी बैठकों के लिए आचार संहिता में राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा निश्चित किया गया है. पार्टी की वेबसाइट पर मुलाक़ात के विवरण प्रकाशित किये जाएंगे.

अनुच्छेद 21- आपातकालीन बैठकें

सभी स्तरों पर, पार्टी के संबंधित इकाई के अध्यक्ष (और एक प्राथमिक इकाई के मामले में, संयोजक) को किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने या उस पर फैसला लेने के लिए निर्वाचक मंडल की तत्काल आपात बैठक बुलाने का अधिकार होगा. इस तरह की आपातकालीन बैठकों में लिए गए सभी फैसलों को अगले स्तर पर उचित तरीके से होने जा रही बैठक में निर्वाचक मंडल में पुष्टि जरूरी है। यह स्पष्ट किया जा रहा है कि ऐसे आमराय से प्राप्त फैसले की कोई भी अमान्य बिंदु आपातकालीन बैठक में लिए गये निर्णय से रद्द हो जाएगा.

अनुच्छेद 22 – कोरम

1. पार्टी के अंग / निकाय की कुल सदस्यता से एक-तिहाई कोरम गठित होगा.

2. राष्ट्रीय कार्यकारी समिति द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वीडियो या अन्य दृश्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर उपस्थित भी हो सकते हैं.

3. किसी बैठक में उपस्थित एक और या 2 लोगों के विशेष कोरम की स्थित में बैठक उसी स्थान पर 7 दिनों में निलंबित की जाएगी और फिर से कोरम की बैठक बुलाने के लिए 20 प्रतिशत सदस्य होने जरूरी होंगे.

4. इस बैठक में कोरम के मौजूद न हो, तो बैठक में एक ही स्थान पर 7 दिनों के लिए बैठक स्थगित की जाएगी और पूर्व निर्धारित बुलाई गई बैठक के समय और इस तरह की दोबारा होने वाली बैठक में सदस्यों को 10 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए। 50 सदस्य जो भी कम हों या भारत सरकार द्वारा घोषित राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में उपस्थित होने वाले सदस्य कोरम के दायरे में माने जाएंगे।

अनुच्छेद 23-निर्णय और पारदर्शिता

1. पार्टी की किसी भी इकाई के सभी फैसले लिखित रूप में होंगे, अध्यक्ष के हस्ताक्षर होंगे और ऐसे निर्णय के 7 दिनों के भीतर पार्टी की वेबसाइट/इंट्रानेट पर इसे प्रकाशित किया जाएगा।

2. बशर्ते, रणनीतिक कारणों से पार्टी के वेबसाइट/इंट्रानेट पर ऐसा कोई निर्णय सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, यदि राष्ट्रीय अध्यक्ष इस तरह के प्रकाशन के विरुद्ध लिखित में कारण बता दें.

3. पार्टी की किसी भी इकाई या आधिकारी द्वारा लिए गए सभी फैसले लिखित रूप में होंगे और पार्टी की फाइलों में इस तरह के लिखित फैसले को रखा जाएगा. सभी सामान्य कार्य अवधि में उस स्थान पर पार्टी के किसी भी अधिकारी द्वारा जांचने के लिए वह उपलब्ध होगा, जहां इस तरह के रिकॉर्ड रखे हों

अनुच्छेद-24 विविध

1. पार्टी की वेबसाइट और इंट्रानेट राष्ट्रीय अध्यक्ष के सीधे नियंत्रण में रहेगी, जो इसके कार्य, संचालन, अपडेट और रखरखाव के लिए जिम्मेदार होगा। पार्टी वेबसाइट और इंट्रानेट के संबंध में कार्य करने और इसे चलाने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष को एक या इससे अधिक व्यक्ति नियुक्त करने का हक होगा।

2. भारत के चुनाव आयोग द्वारा आयोजित चुनाव लड़ने में पार्टी अपने पंजीकरण की पांच वर्षों की अवधि के भीतर और उसके बाद चुनाव में उम्मीदवार खड़े करेगी.

3. प्रत्येक वित्त वर्ष के अंत के 6 महीनों के भीतर भारत के चुनाव आयोग को पार्टी अपनी वार्षिक वित्तीय रिपोर्ट (आर.टी.आई.) सौंपेगी और पार्टी खातों का ऑडिट भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक या ऐसे अन्य लेखा परीक्षक की ओर से लेखा परीक्षक द्वारा किया जाएगा. पार्टी का कोष केवल राजनीतिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जाएगा और पार्टी समय-समय पर अपने खातों के रखरखाव में भारतीय चुनाव आयोग द्वारा जारी निर्देशों का पालन करेगी।

4. पार्टी किसी भी स्थिति में हिंसा को बढ़ावा नहीं देगी या भड़काने में शामिल नहीं होगी.